#poetry #hindipietry

एक एक दिये से हमनें कुछ नेमतें है मांगी।
होंसले संजोकर दिलमें धडकनें सजा ली।

थक गए जरा सा, तीर अंधेरों में चलाकर ।
पर जीतनी है बाजी, तो कोशिशें है जारी ।

जानते है हम की, दुश्मन हे यह ताकतवर ।
सोच-समझके फिर भी, बाजी तो है लगानी ।

वो चाहे कितना सताले, जीतना हे हमको।
ईश्वर की आशिकी में श्रद्धा हमारी न्यारी ।

पल पल फिसलता जाए रेत का ये दरिया।
कर लो खुद से यारी, सफर लगेगी प्यारी।

-शर्मिष्ठा”शब्दकलरव”।

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