#hindisongs #hindipoetry #firsttry

थोड़ी दूर साथ चलो, इस राह की सफर में..
हा..हा..हा….हा…हा, यह राझ़ की सफर हैं…

निकलेगीं कुछ शाखें, इस सूखे से सजर में..
खिल जाएगा यूहीं दिल, नजरों ही नजर में..
हाथ में हाथ लिए, वेरान सी डगर में..
थोड़ी दूर साथ चलो, इस धूप की सफर में..
हा..हा..हा….हा…हा, यह राझ़ की सफर हैं…

कोई रंग नया सा ही, सज उठेगा सांज ढले…
कई बातें अनकही सी, सुन लेंगे गगन तले..
कोई याद पुरानी सी, घुल जाएगी जेहन में..
थोड़ी दूर साथ चलो, इस सांज की सफर में..
हा..हा..हा….हा…हा, यह राझ़ की सफर हैं…

साकार इसको कर लूँ, मेरा स्वप्न पुराना है,
मिटाकर खुद की हस्ती, तुझमें ही मिलाना हैं..
सबकुछ करुं समर्पण, मनभावन के चरन में..
थोड़ी दूर साथ चलो, इस इश्क़ की सफर में..
हा..हा..हा….हा…हा, यह राझ़ की सफर हैं…

थोड़ी दूर साथ चलो, इस राह की सफर में..
हा..हा..हा….हा…हा, यह राझ़ की सफर हैं…
-शर्मिष्ठा”शब्दकलरव”.

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